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मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख शहर है। इसके पूर्व में गंगा एंव पश्चिम में हरियाणा राज्य से लगी सीमा पर यमुना नदी की उपस्थिति ने इस क्षेत्र को कृषि एंव औघोगिक विकास के लिए सर्वथा उपयुक्त वातावरण प्रदान किया गया है। अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों, उपजाऊ भूमि एंव देश की राजधानी से निकटता के परिणामस्वरूप गत दशको में इस नगर का विकास प्रदेश के औघोगिक एंव कृषि केन्द्र के रूप में हुआ है। देश की राजधानी से लगभग 70 किमी0 की दूरी पर ्रराष्ट्रीय राज मार्ग संखया 58 एंव राज्य राज मार्ग संखया 18 पर स्थित है। तथा रेलमार्ग द्वारा दिल्ली, सहारनपुर, लखनऊ हरिद्वार आदि देश के प्रमुख नगरो से सीधा जुडा है। मेरठ महानगर तथा उसके आसपास के क्षेत्रो में सुनियोजित विकास तथा आधुनिक आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से उ0प्र0 शासन ने छावनी क्षेत्र नाविक, सैनिक या वायु सेना के प्रयोजनार्थ, केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन अथवा उनके द्वारा अधिग्रहित पटटे पर ली गयी भूमि को छोडकर नगर निगम, मेरठ की सीमाओं के अन्तर्गत तथा नगर निगम की सीमा के बाहर चारों ओर किमी0 की परिधि के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र को शासनादेश संखया1705/37/2-डीए-72 दिनांक 10 जून, 1976 के द्वारा मेरठ विकास विनियमित क्षेत्र घोषित किया गया है। शासनादेश संखया 6218/37-4डी/ 72 लखनऊ दिनांक03 नवम्बर, 1976 द्वारा मेरठ विकास प्राधिकरण का गठन किया गया। सर्वप्रथम मेरठ महायोजन वर्षᅠ1978 में अनुमित13.40 लाख जनसंखया हेतु वर्ष 1971-91 की अवधि हेतु तैयार की गयी थी। वर्ष 1991 की जनगणना के अनुसार मेरठ नगर की जनसंखया 8.47 लाख रही हैं। इस प्रकार वर्ष 1978में तैयार की गयी महायोजन में अनुमानित जनसंखया कम रही। राष्ट्र्रीय राजधानी क्षेत्र योजना के अन्तर्गत मेंरठ नगरीय क्षेत्र में वर्ष 2001 के अन्त तक 11.50 लाख की गयी थी। वर्ष 1971-91 हेतु तैयार की गयी।

महायोजना एंव वर्तमान मे हुए विकास तथा राष्ट्र्रीय राजधानी क्षेत्र योजना के अन्तर्गत वर्ष 2001 तक के लिए प्रस्तावित 11.50 लाख की जनसंखया हेतु आवासीय एंव औघोगिक विकास की सम्भावनाओ तथा आवद्गयक जनसुविधाओ की आपूर्ति हेतु मेरठ महायोजन-2001 तैयार की गयी। उक्त महायोजना-2001 को द्गाासनादेद्गा संखया 2780/9-आ-3-96 -5 महा0/1996 दिनांक 02-07-1996 द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दिनांक 14-08-1996 से लागू किया गया है। महायोजना -2021 में लगभग 130व्यक्ति प्रति हैक्टेयर की जनसंखया घनत्व प्राप्त किया जाना प्रस्तापित है। मेरठ महायोजना -2001 में प्रस्तावित भू – प्रयोग निम्नानुसार हैः-

क्र्मांक
भू – उपयोग
क्षेत्रफल
(हैक्टे0 में)
1.
निर्मित आवासीय क्षेत्र
2119.40
14.90
2.
आवासीय
4662.40
32.78
3.
वणिज्यिक
176.30
1.24
4.
औघोगिक
1292.80
9.09
5.
गोदाम वेयर हाउंिसंग
192.00
1.35
6.
कार्यालय
303.40
2.13
7.
समुदांियक सुविधाऐं
1743.60
12.26
8.
मनोरंजन एंव खुले स्थल
2358.60
16.58
9.
यातायात एंव परिवहन
1376.90
9.67
10.
कुल
14223.40
100.00

वर्ष 2001-2021 तक के लिए महायोजना प्राधिकरण बोर्ड द्वारा दिनांक 24-5-2004 को स्वीकृत कर द्गाासन के अनुमोदन हेतु प्रेषित की गयी है। दौराला नगर पंचायत सहित 17 गांवो को प्राधिकरण विकास क्षेत्र में सम्मलित किया गया है जिसकी महायोजना तैयार करने हेतु नगर एंव ग्राम्य नियोजन को कार्य सौंपा गया है।

मेरठ महानगर के सुनियोजित विकास तथा आधुनिक आवासीय, औघोगिक, वाणिज्य एंव अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मेरठ के चतुर्मुखी विकास केउद्‌देश्य से विकास प्राधिकरण द्वारा विभिन्न योजनाओं हेतु भूमि अर्जित की गयी है। प्राधिकरण द्वारा निम्नांकित योंजनाओ का क्रियान्वयन किया जा रहा हैः-

1
पल्लवपुरम योजना
10
श्रद्धापुरी योजना प्रथम चरण
2
सैनिक विहार योजना
11
श्रद्धापुरी योजना द्वितीय चरण
3
लेहियानगर योजना
12
वेदव्यासपुरी
4
बेगम बाग योजना
13
शताब्दीनगर योजना
5
रक्षापुरम योजना
14
पाण्डवनगर योजना
6
डिफैंस एन्क्लेव योजना
15
गंगानगर योजना
7
मोहनपुरी योजना
16
आलोक विहार योजना
8
मेजर ध्यानचन्द स्पोर्टस गुडस काम्पलैक्स
17
हर्षनगर योजना
9
स्ूारजकुण्ड योजना
18
विकास भवन

योजनाओ के समुचित विकास एंव निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार कर पाण्डवनगर, श्रद्धापुरी (प्रथम चरण) पल्लवपुरम, रक्षापुरम, मोहनपुरी योजनाओ में निर्माण एंव विकास कार्य लगभग पूर्ण कियें जा चुकें है। उक्त योजनाओं के अतिरिक्त शताब्दीनगर, श्रद्धापुरी (द्वितीय चरण), सैनिक विहार, डिफैंस एन्क्लेव, वेदव्यासपुरी, गंगानगर, लोहियानगर में निर्माण /विकास कार्य प्रगति पर है।

पिछले वर्ष 2004-05 में शहर के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। अवस्थापना निधि से कुछ विशेष कार्य कराये गये, जिसमे मेरठ शहर में दाखिल होने वाली कई सडको का पुनर्निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसके साथ ऐतिहासिक महत्व के स्थल जैसे ”शहीद स्मारक पार्र्क” का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है।

प््रााधिकरण के कार्यकलाप निम्नानुसार हैः-
1. विकास क्षेत्र के सुनियोजित विकास हेतु महायोजना तैयार करना और उसके अनुसार विकास सुनिश्चित करना।
2. आवासीय एंव अन्य योजनाओ के लिए भूमि और अन्य सम्पत्ति का अर्जन, धारण , प्रबन्धन एंव निस्तारण ।
3. अवस्थापना सुविधाओं यथा जल आपूर्ति, जल एंव मल निस्तारण तथा अन्य जन सुविधाओ के प्राविधान हेतु निर्माण, अभियान्त्रिकी, खननएंव अन्य क्रियाऐं कार्यान्वित करना ।
4. विकास व निर्माण कार्यो हेतु विकास / निर्माण अनुज्ञा जारी करना तथा विकास एंव निर्माण कार्यो का विनियमन ।